Leh Ladakh Protest: BJP दफ्तर में आगजनी, पुलिस गोलीबारी में 4 की मौत.. कौन जिम्मेदार?

Leh Ladakh Protest: लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 15 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को अपना अनशन खत्म कर दिया। यह फैसला उस वक्त लिया गया, जब लद्दाख की राजधानी लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों ने हालात बिगाड़ दिए।

वांगचुक ने एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा, “लेह में बेहद दुखद घटनाएं हुईं। शांतिपूर्ण विरोध का मेरा संदेश असफल रहा। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि हिंसा का रास्ता न अपनाएं, इससे हमारा उद्देश्य कमजोर होगा।” उन्होंने इस प्रदर्शन को ‘जेन जेड क्रांति’ बताया और बेरोजगारी व लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी को अशांति की वजह कहा।

केंद्र का आरोप– भीड़ को भड़काया

गृह मंत्रालय ने वांगचुक पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ और ‘Gen Z’ जैसे आंदोलनों का हवाला देकर भीड़ को उकसाया। मंत्रालय ने बताया कि वांगचुक की चार प्रमुख मांगों, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा, कारगिल और लेह को अलग लोकसभा सीट, और सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता पर पहले से ही उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) चर्चा कर रही थी।

सरकार ने यह भी कहा कि लद्दाख में अनुसूचित जनजाति आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% कर दिया गया है, परिषदों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया गया है, भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक मान्यता मिली है और 1800 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कैसे भड़की हिंसा
24 सितंबर को लेह के NDS मेमोरियल ग्राउंड में बड़ी संख्या में छात्र जुटे। प्रदर्शनकारियों ने पहले पथराव किया और फिर बीजेपी दफ्तर में आगजनी कर दी। हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जिसमें चार लोगों की मौत और 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

यह विरोध 10 सितंबर को शुरू हुआ था। वांगचुक की चारों मांगों पर केंद्र सरकार की अगली बैठक 6 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित थी। 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया था। उस समय केंद्र ने हालात सामान्य होने के बाद लद्दाख को राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया था।

 

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