हसदेव बचाओ: अंबिकापुर में धरना, कोयला खनन परियोजनाओं के विरोध में उठी आवाज़

अंबिकापुर (सरगुजा)। समृद्ध जैव विविधता और घने वनों के लिए प्रसिद्ध हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई और कोयला खनन के विरोध में हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने 23 सितंबर 2025 को गांधी चौक में एक दिवसीय धरना दिया। समिति ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए, जंगलों की कटाई तत्काल रोकने और सभी कोयला खनन परियोजनाओं की स्वीकृतियाँ रद्द करने की मांग रखी।

12 लाख से अधिक पेड़ों पर संकट

रिपोर्टों के अनुसार हसदेव क्षेत्र में राजस्थान राज्य विद्युत निगम को आवंटित परसा ईस्ट केते बासेन, परसा और केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का संचालन अदानी समूह कर रहा है। खनन के लिए लगभग 12 लाख पेड़ों की कटाई अनुमानित है। यह इलाका न केवल हाथियों के प्राकृतिक रहवास का हिस्सा है बल्कि हसदेव और रिहंद जैसी नदियों का कैचमेंट क्षेत्र भी है।

पर्यावरण और पुरातत्व पर गहरा असर

धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि कोयला खनन से प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे, नदियां प्रदूषित हो रही हैं और मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है। रामगढ़ की पहाड़ी और प्राचीन नाट्यशाला जैसे पुरातात्विक व धार्मिक महत्व के स्थल भी खनन और विस्फोटों से क्षति झेल रहे हैं।

पुराने संकल्पों की याद दिलाई

समिति ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा भारतीय वन्य जीव संस्थान ने चेतावनी दी थी कि यहां खनन से पूरे प्रदेश में हाथी संघर्ष विकराल हो सकता है। अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी ग्रामसभा प्रस्तावों को फर्जी पाते हुए परसा कोल ब्लॉक की स्वीकृति निरस्त करने की अनुशंसा की थी।

प्रमुख मांगें

धरना स्थल पर प्रस्तुत ज्ञापन में ये मुख्य मांगें रखी गईं—

  • हसदेव अरण्य को पुनः ‘नो गो ज़ोन’ घोषित कर लेमरू हाथी रिज़र्व और 10 किमी परिधि में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • रामगढ़ की पहाड़ी और प्राचीन नाट्यशाला की वैज्ञानिक जांच और संरक्षण, साथ ही खनन पर रोक।
  • केंते एक्सटेंशन, परसा और अन्य कोल ब्लॉक को दी गई सभी नई स्वीकृतियों की तत्काल वापसी
  • फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों पर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और परसा प्रभावित ग्रामीणों पर दर्ज सभी आपराधिक मुकदमों की वापसी
  • परसा ईस्ट केते बासेन परियोजना से नदियों में छोड़े जा रहे प्रदूषित अपशिष्ट पर रोक और माइनिंग क्लोजर प्लान के अनुसार भूमि पुनर्भरण व पौधरोपण
  • 18 अक्टूबर 2024 को अवैध कटाई के दौरान मृत मजदूर कमलेश सिदार को आपदा राहत नियमों के तहत मुआवजा।

आगे के आंदोलन की चेतावनी

समिति ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो व्यापक और सतत जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। संयोजक मंडल में भानु प्रताप सिंह, त्रिभुवन सिंह, जी.डी. सोड़ी, उमेश्वर सिंह आर्मो, आलोक शुक्ला और आनंद प्रकाश शामिल थे।

 

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