अब्दुल गनी भट के निधन पर कश्मीरी नेताओं का शोक, अंतिम यात्रा में शामिल होने से रोके गए

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अलगाववादी नेता और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल गनी भट के निधन के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद लोन और हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने दावा किया कि उन्हें गुरुवार को नजरबंद कर दिया गया और सोपोर जाकर अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोक दिया गया।

90 साल की उम्र में अब्दुल गनी भट का निधन

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अब्दुल गनी भट का लंबी बीमारी के बाद बुधवार (17 सितंबर) शाम सोपोर स्थित उनके आवास पर निधन हुआ। उनकी उम्र 90 वर्ष थी। गनी भट को कश्मीर की सियासत में एक शांतिप्रिय और संवाद के हिमायती नेता के तौर पर जाना जाता था।

महबूबा मुफ्ती का आरोप: लोकतंत्र पर हमला

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र पर हमले का सबूत है। बीजेपी को यहां शांति या सुधार में कोई रुचि नहीं है। वे इस क्षेत्र को लगातार अशांति में रखकर देश के बाकी हिस्सों में राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं। यह खतरनाक और निंदनीय है।”

मीरवाइज उमर फारूक की नाराज़गी

मीरवाइज उमर फारूक ने भी दावा किया कि बुधवार देर रात से उन्हें घर में बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझे गहरा दुख है कि अधिकारियों ने गनी साहब के परिवार को जल्दी जनाज़ा करने के लिए मजबूर किया। मैं उनके अंतिम सफर में शामिल नहीं हो सका, यह असहनीय है। हमारी दोस्ती और मार्गदर्शन का रिश्ता 35 साल पुराना था।”

सज्जाद लोन का बयान

पूर्व मंत्री और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद लोन ने कहा, “मुझे प्रो. गनी साहब के पैतृक गांव बोटिंगू जाने से रोका गया। समझ नहीं आता कि यह क्यों किया गया। गनी साहब तो शांति के प्रतीक थे और लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। अंतिम विदाई का हक़ सभी को है।”

 

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