7188 महिलाएं लापता, न सुराग न जवाब: छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट ने बढ़ाई सनसनी, पुलिस व्यवस्था पर सवाल
महिलाएं लापता
छत्तीसगढ़ में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। गृह विभाग से जारी आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में महिलाओं के गुमशुदा होने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। खास तौर पर रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में यह स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। कई मामलों में महिलाओं और लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका सामने आती है, लेकिन शुरुआती स्तर पर पुलिस अधिकतर प्रकरणों में सिर्फ गुमशुदगी का केस दर्ज करती है। जांच के दौरान यदि अपहरण या अन्य आपराधिक पहलू की पुष्टि होती है, तभी संबंधित धाराएं जोड़ी जाती हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक केवल रायपुर में ही 1243 लड़कियां और 5481 महिलाएं लापता हुई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजधानी में महिलाओं की गुमशुदगी का ग्राफ लड़कियों की तुलना में कहीं ज्यादा ऊंचा है। इसी तरह बिलासपुर में इसी अवधि के दौरान कुल 4294 महिलाएं और लड़कियां गायब हुईं, जिनमें से 3387 को पुलिस ने बरामद कर लिया, लेकिन बड़ी संख्या में अब भी कई लोग लापता हैं। बिलासपुर में भी 1086 लड़कियों की तुलना में 3208 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज हुए हैं। वहीं दुर्ग में इसी अवधि में 2565 महिलाओं और 752 लड़कियों के गुमशुदा होने की सूचना पुलिस तक पहुंची है।
रायपुर में रोजाना लगभग एक लड़की के गायब होने जैसी स्थिति
राजधानी रायपुर में गुमशुदगी के आंकड़े सबसे अधिक चिंता पैदा करने वाले हैं। यहां हालात ऐसे हैं कि औसतन लगभग हर दिन एक लड़की के गायब होने की सूचना सामने आ रही है। वर्ष 2023 में रायपुर से 355 लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली थी। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 410 हो गई और वर्ष 2025 में 478 लड़कियां गुमशुदा दर्ज की गईं। वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला थमा नहीं है और 31 जनवरी तक ही 49 लड़कियों के लापता होने की सूचना थानों तक पहुंच चुकी थी।
हालांकि कुछ मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली है। इस वर्ष जनवरी तक दर्ज 49 मामलों में से 22 लड़कियों को पुलिस ने खोज निकाला है। इन मामलों में जो कारण सामने आए, उनमें बहला-फुसलाकर ले जाने जैसी बातें प्रमुख रहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि केवल गुमशुदगी के रूप में दर्ज होने वाले कई मामलों के पीछे गंभीर आपराधिक एंगल भी छिपे हो सकते हैं।
रायपुर में महिलाओं की गुमशुदगी के आंकड़े और अधिक चौंकाने वाले
रायपुर में केवल लड़कियां ही नहीं, बड़ी संख्या में महिलाएं भी लापता हो रही हैं। गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में राजधानी से 1590 महिलाएं गुमशुदा हुई थीं। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1726 हो गई, जबकि वर्ष 2025 में 1982 महिलाओं के लापता होने की सूचना दर्ज हुई। वर्ष 2026 में 31 जनवरी तक ही 183 महिलाओं की गुमशुदगी की रिपोर्ट थानों में दर्ज हो चुकी है।
इनमें से 110 महिलाओं को पुलिस ने खोज निकाला है, लेकिन बाकी मामलों में अब भी तलाश जारी है। लगातार बढ़ते आंकड़े यह दिखाते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा और गुमशुदगी मामलों की रोकथाम एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
बिलासपुर में भी तेजी से बढ़े गुमशुदगी के मामले
बिलासपुर, जो तेजी से बड़े शहर की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहां भी महिलाओं और लड़कियों की गुमशुदगी के मामले गंभीर रूप ले रहे हैं। वर्ष 2023 में बिलासपुर जिले से 895 महिलाएं लापता हुई थीं। इनमें से 737 को पुलिस ने खोज लिया, लेकिन 158 महिलाओं की उस समय तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। इसी अवधि में 341 लड़कियां गुमशुदा हुईं, जिनमें से 327 को पुलिस ने वापस लाने में सफलता पाई।
वर्ष 2024 में बिलासपुर से 1033 महिलाओं की गुमशुदगी की सूचना दर्ज हुई। इनमें से 813 महिलाओं के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई, लेकिन 220 का कोई सुराग नहीं लग सका। इसी वर्ष 358 लड़कियां गायब हुईं, जिनमें से 327 को तलाश लिया गया। वर्ष 2025 में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिखा। उस साल जिले से 1171 महिलाएं लापता हुईं, जिनमें से 341 की तलाश अब भी जारी रही। इसी अवधि में 359 लड़कियों के गायब होने की सूचना मिली, जिनमें से 283 को पुलिस ढूंढने में सफल रही।
वर्ष 2026 में जनवरी महीने तक ही बिलासपुर से 109 महिलाओं के लापता होने की सूचना दर्ज हो चुकी थी। इनमें से 53 के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई, जबकि बाकी मामलों में तलाश जारी है।
चार जिलों के आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया
गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक चार जिलों में महिलाओं की गुमशुदगी के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। इनमें रायपुर सबसे ऊपर है, जहां 5481 महिलाएं लापता हुईं। इसके बाद बिलासपुर में 3208, दुर्ग में 2565 और बलौदाबाजार में 1922 महिलाओं के गुमशुदा होने की सूचना दर्ज की गई।
इसी अवधि में लड़कियों के लापता होने के मामलों में भी रायपुर सबसे आगे रहा, जहां 1243 लड़कियां गायब हुईं। बिलासपुर में 1086, दुर्ग में 752 और बलौदाबाजार में 699 लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि समस्या किसी एक शहर या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बड़े और मध्यम शहरों में यह गंभीर रूप ले चुकी है।
गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि महिलाओं और लड़कियों की गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती स्तर पर किस तरह की पुलिस कार्रवाई होती है। आमतौर पर पुलिस ऐसे मामलों में पहले गुमशुदगी का केस दर्ज करती है। अपहरण, मानव तस्करी या बहला-फुसलाकर ले जाने जैसी धाराएं तभी जोड़ी जाती हैं, जब जांच के दौरान कुछ ठोस तथ्य सामने आते हैं।
यही वजह है कि कई सामाजिक और कानूनी जानकार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के गायब होने के मामलों में शुरुआती जांच ज्यादा संवेदनशील और तेज होनी चाहिए। कई बार शुरुआती घंटों की देरी ही मामले को ज्यादा जटिल बना देती है।
बढ़ती घटनाएं पुलिस और समाज दोनों के लिए चेतावनी
छत्तीसगढ़ में महिलाओं और लड़कियों की बढ़ती गुमशुदगी केवल पुलिस के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है। लगातार बढ़ते आंकड़े यह संकेत देते हैं कि शहरीकरण, सामाजिक असुरक्षा, बहला-फुसलाकर ले जाने वाले गिरोह, पारिवारिक तनाव, रोजगार या अन्य कारणों के बीच कई महिलाएं और लड़कियां जोखिम में हैं।
ऐसे में जरूरत केवल मामलों के दर्ज होने और जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता, त्वरित पुलिस कार्रवाई, ट्रैकिंग सिस्टम, संवेदनशील जांच और समुदाय स्तर पर सतर्कता बढ़ाने की भी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के नजरिए से और ज्यादा गंभीर बहस का विषय बन सकता है।
