208 नक्सलियों का आत्मसमर्पण: मुख्यमंत्री के सामने हथियार डालकर सीनियर हार्डकोर कैडर भी मुख्यधारा में लौटे

208 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

208 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को लेकर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। शुक्रवार को 208 माओवादी कैडरों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने आत्मसमर्पण किया। यह अब तक का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर माना जा रहा है। इसमें सीनियर हार्डकोर कैडर के नक्सली भी शामिल हैं, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वागत गुलाब के फूल और भारत के संविधान की प्रति देकर किया गया।

औपचारिक पुनर्समावेशन समारोह का आयोजन:

सरेंडर के अवसर पर रिज़र्व पुलिस लाइन, जगदलपुर (बस्तर) में औपचारिक पुनर्समावेशन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी और पुलिस प्रशासन के अन्य आला अधिकारी मौजूद रहे।

नक्सलियों ने मुख्यमंत्री के सामने हथियार डाले

समारोह में 208 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के समक्ष आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए अपने हथियार जमा किए। उन्होंने संविधान में विश्वास जताया। नक्सलियों के स्वागत के लिए उनके हाथों में भारत का संविधान और गुलाब का फूल दिया गया।

सरेंडर किए गए हथियार

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सीसी मेंबर, दंडनायक स्पेशल जोनल कमेटी और जनमिलिसिया कमेटी के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने जो हथियार छोड़े उनमें शामिल हैं: 19 AK-47 राइफल, 17 SLR राइफल, 23 INSAS राइफल, 1 INSAS LMG, 36 जोड़ी .303 राइफल, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 नग 12 बोर और सिंगल शॉट ।

मुख्यमंत्री ने कहा: अब बस्तर में भय नहीं, विकास और विश्वास की पहचान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि बस्तर अब भय का नहीं, बल्कि विश्वास और विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पिछले 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए। ये आंकड़े राज्य की नक्सलमुक्त बनाने की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

DGP का बयान

छत्तीसगढ़ के DGP अरुण देव गौतम ने कहा, “जो युवा भटक रहे थे, वे बस्तर की जनता के लिए लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें यह एहसास हुआ कि उनके काम से जनता को नुकसान हो रहा था। अब जब वे मुख्यधारा में लौटेंगे और विकास में योगदान देंगे, तो बस्तर तेजी से आगे बढ़ेगा।”

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