Narayanpur Naxal Surrender: माओवादी संगठन को बड़ा झटका, 16 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 9 पर था 48 लाख का इनाम

Narayanpur Naxal Surrender

Narayanpur Naxal Surrender

Narayanpur Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से नक्सल विरोधी मोर्चे पर एक बड़ी सफलता सामने आई है। बुधवार को कुल 16 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इनमें से 9 नक्सलियों पर कुल 48 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी माओवादी संगठन की खोखली और हिंसक विचारधारा से निराश होकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।

आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नाम शामिल

नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं। इनमें सैन्य प्लाटून के डिप्टी कमांडर पोदिया मरकाम उर्फ रतन (34) शामिल है, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।
इसी तरह, मनोज दुग्गा (35), सुमित्रा उर्फ सनी कुर्साम (35), वनीला फरसा (35) और डिविजनल कमेटी सदस्य गावड़े उर्फ दिवाकर (45) पर भी 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

वहीं, एरिया कमेटी सदस्य बुधु उर्फ कमलेश उसेंडी (32) पर 5 लाख रुपये, जबकि मड्डा कुंजाम (21), रवि उर्फ गोपाल वड्डे (23) और कारे कोर्राम (23) पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था।
इसके अलावा, शेष छह अन्य नक्सली प्रतिबंधित संगठन के निचले स्तर के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं।

‘शीर्ष माओवादी नेता आदिवासियों के असली दुश्मन’

पुलिस पूछताछ में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने स्वीकार किया कि शीर्ष माओवादी नेता आदिवासियों को “जल, जंगल और जमीन” के नाम पर बरगलाते हैं और उनका शोषण करते हैं।
उन्होंने कहा कि ये नेता समानता और न्याय के नाम पर झूठे वादे करके युवाओं को हिंसा की राह पर धकेलते हैं। इसी खोखली विचारधारा से निराश होकर उन्होंने अब समाज में लौटने का निर्णय लिया है।

बस्तर में बदलाव की बयार – IG सुंदरराज

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण इस बात का सबूत है कि बस्तर में बदलाव की बयार बह रही है।
उन्होंने कहा, “हिंसा और भय की विचारधारा से थक चुके इन युवाओं ने अब शांति, शिक्षा और विकास का मार्ग चुना है। यह कदम न केवल उनके जीवन की नई शुरुआत है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी है।”

20 महीनों में 1,800 से अधिक माओवादी लौटे मुख्यधारा में

IG सुंदरराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
पिछले 20 महीनों में बस्तर क्षेत्र में कुल 1,837 माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियानों, जनसमर्थन और प्रभावी पुनर्वास नीति के चलते आने वाले दिनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण करने को प्रेरित होंगे।

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