10 Naxalites Surrender in Sukma: शांति की ओर बड़ा कदम, 33 लाख के इनामी 10 बड़े नक्सलियों ने हथियारों समेत किया सरेंडर

Naxalites surrender in Chhattisgarh

Naxalites surrender in Chhattisgarh

10 Naxalites Surrender in Sukma: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सुरक्षाबलों के लगातार तेज होते नक्सल विरोधी अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति के असर से शुक्रवार को 10 बड़े नक्सलियों ने हथियारों समेत आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर IGP बस्तर, SP सुकमा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।

आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली दरभा डिवीजन से जुड़े हुए थे। इन नक्सलियों ने एक एके-47, दो एसएलआर और एक बीजीएल हथियार के साथ सरेंडर किया। इन सभी पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें 8 लाख रुपये का इनामी मीडियम भीमा भी शामिल है। नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा जताई है।

राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ पुनर्वास योजना का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। जो हाथ कभी हथियार थामे हुए थे, वही हाथ अब शांति और विकास का रास्ता चुन रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी।

इस मौके पर बस्तर आईजी पी. सुंदर राज, सीआरपीएफ डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, सुकमा एसपी किरण चव्हाण और कलेक्टर देवेश ध्रुव मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में एक अहम कदम बताया।

नक्सलियों का मजबूत गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ और महाराष्ट्र सीमा से सटे इलाकों में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। जहां पहले नक्सली खुद को सुरक्षित मानते थे, अब वहीं से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। बीते कुछ महीनों में 80 से ज्यादा नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में भी हाल ही में बड़ी सफलता मिली थी। यहां 43 लाख रुपये के इनामी दो बड़े नक्सली रोहित और दीपक ने सरेंडर किया था। दीपक को मध्य प्रदेश का आखिरी रजिस्टर्ड नक्सली माना जाता था, ऐसे में बालाघाट को औपचारिक रूप से नक्सल मुक्त माना जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर माना जा रहा है कि यह लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल किया जा सकता है।

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